Friday, September 11, 2009

अब उदास होना भी अच्छा लगता है

अब उदास होना भी अच्छा लगता है ,
किसी का पास होना भी अच्छा लगता है ,
मै दूर रह कर किसी कि यादो मे हू ,
यह अह्सास भी होना अच्छा लगता है ।

26 comments:

अनिल कान्त : said...

ehsaas ka jadu likhwa raha hai aapse

pankaj vyas said...

आप एक आदमी है यहा जानकर हरष हुआ
वरना कोन अपने को आदमी मानता है...

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत खूब तिवारी साहब, शुभकामनाएं.

रामराम.

Amit K Sagar said...

बहुत-बहुत उम्दा सर जी.
वाह! जारी रहें.


*-*-*
क्या आप उल्तातीर के लेखक बनाना चाहेंगे? विजिट- http://ultateer.blogspot.com

'अदा' said...

khoobsurat hai !!!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

सजा-संवरा कता प्रबावित करता है।
बहुत बधाई।

Udan Tashtari said...

बहुत बढ़िया तिवारी साहब. आपकी लेखनी प्रभावित करती है. :)

Dr. Mahesh Sinha said...

शायद आप अपने मित्रों को छुपाना चाहते हैं गुरु उड़न तस्तरी की तरह इसीलिए कोई जुड़ने का लिंक नहीं है :) ऊं साईं राम

Pankaj Upadhyay said...

waah kya ahsaas hai..ekdam naya aur ekdam sachha..

दिगम्बर नासवा said...

EHSAAS SE BHARI DOORIYAN ..... KAMAAL KI NAZM HAI ... LAJAWAAB

हेमन्त कुमार said...

सुखद अहसास हॊने लगे तो ऐसा ही होता है । आभार ।

डा. अमर कुमार said...


लेखनी प्रभावित करती है

Dipti said...

लेखनी प्रभावित करती है

प्रदीप कुमार said...

सजा-संवरा कता प्रबावित करता है।

योगेश स्वप्न said...

sanju ji, char panktian gazab dha rahi hain. bahut khoob. badhai.

sanju bhai, aapko meri lekhni ne prabhavit kiya , dhanyawaad. aapka mere blog par swagat.punah padharen.

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

सुन्दर ...बहुत बहुत बधाई....

शिवम् मिश्रा said...

संजू जी,
अब तो शक होने लगा है कि आप क्या सच में पूरा लेख पढ़ते है या केवल टिप्पणी कॉपी - पेस्ट करते है ? लगभग हर ब्लॉग में आप की येही टिप्पणी होती है :-
"लेखनी प्रभावित करती है" या फिर "आपकी लेखन शैली का कायल हूँ"
मामला समझ के परे है, भाई |

Kindly check the given link for verification of the above statement.

http://burabhala.blogspot.com/2009/09/911.html?showComment=1252676474981#comment-c1311390002671756215

शिवम् मिश्रा said...
This comment has been removed by the author.
गरुणध्वज said...

आपकी लेखन शैली का कायल हूँ |

लेखनी प्रभावित करती है


:( :P

लाल और बवाल (जुगलबन्दी) said...

वाह वाह संजय साहब। क्या कहना।

कार्तिकेय मिश्र (Kartikeya Mishra) said...

सही कहा |

किसी की यादों में होने का अहसास सचमुच सुखद होता है.

इस रूमानियत के लिए मेरी बधाई स्वीकारें.

Navnit Nirav said...

achchhi pantiyan hain aapki.
Navnit Nirav

RAJESH RANJAN said...

bahut shandar sanju ji. simply- kya bat hai.

RAJESH RANJAN said...

bahut shandar sanju ji. simply- kya bat hai.

Nitish Raj said...

बहुत बढ़िया रहा तिवारी साहब, धन्यवाद और शुभकामनाएं.

रज़िया "राज़" said...

मै दूर रह कर किसी कि यादो मे हू ,
यह अह्सास भी होना अच्छा लगता है ।
बहोत खूब!!!