याद आना दिल दुखाना,कितना खास सा हो गया ,
रहा सुनता रोज था,चला जाऊँगा मै फिर एक दिन,
यूँ छोड़ कर तेरा जाना, अनायास सा हो गया ,
न आने को जाते, तो बहला लेते हमीं खुद को
समझ लेते अब समीर इक आस सा हो गया.
ताकता आसूं बहाता मैं रह पाऊँगा कब तलक,
नाम तेरा जब भी आया, बदहवास सा हो गया.

7 comments:
याद मे आसूं बहाता मे कहा रह पाता हूं,
ओर तू भी याद करके खुद उदास सा हो गया ॥
बहुत खूबसूरत . शुभकामनाएं.
रामराम.
behad khoobsurat ...bahut achchhi lagi
marmik sunder
बहुत सुन्दर।
तु यार यूँ न सताना-अच्छा तरजुमा किया है विस्तार देकर...जल्दी मिलेंगे.
kya bat hai kaviraj
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